क्या फिर टीम इंडिया को ले डूबेगा ऑपरेशन पैर पर कुल्हाड़ी?

[शिवम् अवस्थी], नई दिल्ली। अगर आप भारतीय क्रिकेट फैन हैं तो जाहिर तौर पर इंग्लैंड के खिलाफ हुई पिछली टेस्ट सीरीज नहीं भूले होंगे..अरे, वही सीरीज जहां हमारे कप्तान साहब ने लगातार स्पिन पिचों की डिमांड करके अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली थी। वैसे आप क्या सोच रहे थे कि अगली सीरीज में ऐसी गलती दोबारा नहीं की जाएगी। तो चलिए हम आपको बता देते हैं कि इस बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी प्लान कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है, और आपको यह भी बताते हैं कि यह फॉर्मूला एक बार फिर कैसे भारी पड़ने वाला है।

जी हां, हमारे कप्तान महेंद्र सिंह धौनी स्पिन के कुछ इस कदर दीवाने हैं कि उन्हें यह मोह छोड़ता ही नहीं। कुंबले के दौर को वह कुछ इस कदर अपने दिल में बसा बैठे हैं कि उन्हें अब हर टेस्ट में वही पुराना दौर, और हर स्पिनर में वही पुराना अनिल कुंबले नजर आता है लेकिन पूरा मैनेजमेंट यह हमेशा भूल जाता है कि पहली गलती तो यह हो रही है कि हम लगातार महीनों पहले से विरोधी टीम को बता रहे हैं कि भाई, हम इस बार भी स्पिन ट्रैक तैयार करने जा रहे हैं, उसी हिसाब से तैयार हो जाओ..और दूसरा यह कि हम हमेशा भूल जाते हैं कि सामने वाली टीम के पास भी स्पिनर मौजूद हैं और ऐसे पेसर भी हैं जो स्पिन ट्रैक को भी कहर बरपाने वाली पिच बनाने का दम रखते हैं।

चलिए अब आपको कुछ आंकड़ों और दिलचस्प पहलुओं के जरिए यह बताने की कोशिश करते हैं कि कैसे यह ऑपरेशन एक बार फिर पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा साबित हो सकता है। जैसा कि आपको बताया कि हम हमेशा यह भूल जाते हैं कि विरोधी टीम के पास भी मैदान पर उतरने के लिए उतने ही 11 खिलाड़ी हैं और उतने ही काबिल स्पिनर्स। बेशक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 81 विकेट लेने वाले सबसे सफल गेंदबाज हरभजन सिंह लौट आए हैं लेकिन क्या उनका पिछले कुछ सालों का अंतरराष्ट्रीय करियर भी हमें उसी संजीदगी से सीना चौड़ा करने का मौका देता है जैसा पहले हुआ करता था? इसके अलावा इस बात को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है कि कंगारू टीम के पास बेशक कम नामी स्पिनर मौजूद हैं लेकिन वे युवा हैं, उन्हें हमने कम खेला है और वे जोश से लबरेज लगातार अंतरराष्ट्रीय पिचों पर अच्छा प्रदर्शन दे रहे हैं। टीम में दो नाथन मौजूद हैं। स्पिनर नाथन ल्योन और नाथन हॉरिट्ज। कभी मैदान की घास काटने वाले ल्योन ने महज 19 टेस्ट मैचों में अब तक 61 विकेट चटकाए हैं जबकि भारतीयों के लिए एक समय वनडे में सिरदर्द बन चुके हॉरिट्ज 16 मैचों में 58 विकेट झटक चुके हैं। यही नहीं, इसके अलावा उनके पास भारतीय परिस्थियों को समझने वाले माइकल क्लार्क एक स्पिनर के तौर पर मौजूद हैं, वहीं, आईपीएल में भारतीय पिचों का अनुभव हासिल करने वाले स्टीवन स्मिथ, जेवियर डोहरटी व इस बार के सबसे महंगे आईपीएल खिलाड़ी ग्लेन मैक्सवेल जैसे स्पिनर्स भी मौजूद हैं जो कभी भी आउट ऑफ फॉर्म अश्विन व भज्जी या कभी-कभी चलने वाले ओझा पर भारी पड़ सकते हैं।

दूसरा और अहम पहलू: जैसा कि हमने आपको बताया कि हम स्पिन ट्रैक के चक्कर में यह भूल जा रहे हैं कि टेस्ट में तेज गेंदबाजों का भी कोई किरदार होता है। क्या आपको पता है कि पिछले 10-11 सालों में भारतीय पिचों पर अब तक कंगारू स्पिनर्स से ज्यादा उनके तेज गेंदबाज सफल रहे हैं...कुछ आंकड़ों की मानें तो उनके तेज गेंदबाजों ने हमारी पिचों पर 2001-2012 के बीच 32.65 की औसत से 145 विकेट चटकाए हैं जबकि उनके फिरकी गेंदबाज इस दौरान 40.65 की औसत से सिर्फ 69 विकेट ही हासिल कर पाए हैं। तो धौनी साहब, क्या आपको नहीं लगता कि हमें अपने फास्ट अटैक को भी मजबूत बनाने की जरूरत है ना कि सिर्फ स्पिन पिचों व हरभजन सिंह की मौजूदगी का ढोल पीटने की?

क्या वाकई हमारी पिचें अब बल्लेबाजों को डराती हैं?: रिकी पोंटिंग की जगह टीम में आने वाले ऑस्ट्रेलिया के नए हुनरमंद बल्लेबाज व वनडे क्रिकेट के अपने पहले ही मैच में शतक ठोंकने वाले फिलिप ह्यूग्स की मानें तो भारतीय पिचों में वह बात नहीं दिख रही जो एक दशक या उससे पहले हुआ करती थी। उनके मुताबिक, यह सीरीज काफी चुनौतीपूर्ण जरूर रहेगी लेकिन उन्हें नहीं लगता कि स्पिन पिचों का इसमें कोई योगदान रहने वाला है। ऐसा ही कुछ भारत आने से पहले इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने कहा था और फिर उन्होंने हमारे गेंदबाजों का क्या हाल किया था इसका इतिहास गवाह है। यह और दिलचस्प था कि हमारे स्पिनर्स का तो कुछ पता नहीं चला लेकिन इंग्लैंड के दो स्पिनर्स मोंटी पनेसर और ग्रीम स्वान ने अपने दम पर भारतीय टीम को समेट दिया। ऐसे में बस इतना कहेंगे कि पिच पर ना ध्यान देकर अगर हमारे कोच डंकन फ्लेचर और रांची के राजकुमार कप्तान धौनी अगर रणनीति और अभ्यास पर ज्यादा ध्यान दें तो शायद नतीजों में कुछ सुधार आ सके।