प्रकृति प्रेमी अखिलेश की सरकार पर्यावरण नीति से बेजार

लखनऊ, [राजीव दीक्षित]। पर्यावरण संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरोकार जगजाहिर हैं लेकिन राज्य में पहली बार बनाई जा रही पर्यावरण नीति के प्रति उनकी सरकार बेजार है। निवेश आकर्षित करने के लिए अखिलेश सरकार ने पिछले 14 महीनों में भले ही आधा दर्जन नीतियां घोषित कर दी हों लेकिन राज्य में पर्यावरण नीति बनाने के लिए पिछले चार वर्षो से जारी कवायद सपा सरकार में भी कछुआ चाल चल रही है।

जगी थी उम्मीद : पूर्ववर्ती मायावती सरकार के कार्यकाल में 2009-10 में राज्य में पहली बार पर्यावरण नीति बनाने का काम शुरू हुआ। पर्यावरण निदेशालय ने नीति का प्रारूप तैयार किया। इस प्रारूप को वेबसाइट पर डालकर जनता से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए। इन आपत्तियों और सुझावों को प्रारूप में यथासंभव समाहित किया गया लेकिन संशोधित प्रारूप पर कैबिनेट की मुहर नहीं लग पाई। पिछले साल मार्च में जब सपा सरकार सत्ता में आई तो यह उम्मीद बंधी की कि अरसे से लंबित पर्यावरण नीति के प्रारूप को जल्द मंजूरी मिल जाए। उम्मीद इसलिए भी ज्यादा थी कि पर्यावरण विभाग सिविल इन्वायरमेंट इंजीनियरिंग में स्नातक की योग्यता रखने वाले मुख्यमंत्री के अधीन है।

नीति की खास बातें : नीति के प्रारूप में प्रावधान है कि पर्यावरण को क्षति पहुंचाने या प्रदूषित करने वाले की न सिर्फ जिम्मेदारी तय की जाएगी बल्कि उस क्षति का मूल्यांकन कराया जाएगा। मूल्यांकन के आधार पर उन्हें पर्यावरणीय क्षति की आर्थिक भरपाई करनी पड़ेगी। पर्यावरण प्रदूषण के मामलों को जल्दी निपटाने के लिए विशिष्ट अदालतों के गठन की भी मंशा है। विकास परियोजनाओं और उद्योगों के कारण पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन कराने के उद्देश्य से नीति में 'पर्यावरणीय ऑडिट'ं की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पर्यावरण नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य पर्यावरण संरक्षण परिषद के गठन का प्रस्ताव है।

पिछले साल हुई थी बैठक : अखिलेश सरकार के सत्ता में आने के बाद पर्यावरण नीति को लेकर पिछले साल 19 सितंबर को मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में अंतर विभागीय बैठक हुई थी। उस बैठक में पर्यावरण नीति के उस प्रावधान पर कई विभागों ने आपत्ति जताई थी जिसमें कहा गया था कि खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से कृषि भूमि का भू-उपयोग यथासंभव न बदला जाए। यदि अपरिहार्य कारणों से कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलना पड़े तो इसकी भरपाई के लिए क्षतिपूरक वनीकरण की तर्ज पर उतने ही क्षेत्रफल की ऊसर, गैर कृषि और अनुपजाऊ भूमि का सुधार कर उसे कृषि योग्य बनाया जाए। मुख्य सचिव ने पर्यावरण नीति के प्रारूप पर विभिन्न विभागों से उनके अभिमत मांगे थे। विभागों ने अव्वल तो अभिमत देने में काफी समय लगाया। जब विभागों के अभिमत प्राप्त हुए तो भी कार्यवाही सुस्त रफ्तार से चल रही है।

सपा सरकार की घोषित नीतियां

-अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति, 2012

-खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, 2012

-सूचना प्रौद्योगिकी नीति, 2012

-सौर ऊर्जा नीति, 2013

-चीनी उद्योग, को-जेनरेशन एवं आसवनी प्रोत्साहन नीति, 2013

-पोल्ट्री नीति