विशालकाय ब्लैक होल्स को मापना अब होगा आसान

लंदन। आकाश गंगा के ऊर्जा का स्रोत कहलाने वाले ब्लैक होल्स में से कौन कितना विशाल है, आने वाले दिनों में इसको जानना आसान हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल का द्रव्यमान मापने की नई तकनीक ईजाद करने में कामयाबी हासिल कर ली है। वे अब इन विशाल संरचनाओं के चारों ओर फैले गैस के बादल का अध्ययन कर किसी भी ब्लैक होल का द्रव्यमान आसानी से पता लगा सकेंगे।

वैज्ञानिकों का दावा है कि नई तकनीक के विकास से ब्लैक होल की संरचना को लेकर हमारी जानकारी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। साथ ही आकाश गंगा के आकार-प्रकार को लेकर भी हमारी समझदारी बढ़ने की उम्मीद है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस तकनीक को ईजाद किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार इस विधि के तहत एक दूरस्थ आकाश गंगा के मध्य स्थित ब्लैक होल को चारों ओर से घेरे गैस के बादल [ज्यादातर हाइड्रोजन युक्त] में से कार्बन मोनोआक्साइड गैस के भ्रमण मार्ग की शिनाख्त की जाती है। यह गैस ब्लैक होल के चारों ओर तेजी से चक्कर काटती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हाइड्रोजन बहुतायत वाले गैसीय बादल में कार्बन मोनोआक्साइड गैस की गति का आकलन कर हम ब्लैक होल का द्रव्यमान माप सकते हैं। अधिकतर आकाश गंगा के मध्य स्थित अति विशालकाय ब्लैक होल्स के बारे में विस्तृत जानकारी हमें अभी भी पूरी तरह से हासिल नहीं हो सकी है। 15 वर्षो के अथक प्रयास के बाद वैज्ञानिक अभी तक केवल 60 ब्लैक होल्स का द्रव्यमान ही माप सके हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार अधिकतर ब्लैक होल्स तो इतने दूर हैं कि उन्हें शक्तिशाली हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन से मापना भी एक दुष्कर कार्य समझा जाता है। नई तकनीक के तहत वैज्ञानिकों ने अट्टाकमा लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर अरे [अल्मा] दूरबीन का इस्तेमाल किया है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. माइकल कैपेलरी ने बताया कि गैस के बादल स्थित कार्बन मोनोआक्साइड की गति आधारित तकनीक और अल्मा दूरबीन के साझा इस्तेमाल से हम दूरस्थ आकाश गंगा के मध्य स्थित ब्लैक होल का द्रव्यमान आसानी से माप सकेंगे।