नारी के अनगिनत रूप और भावों का खूबसूरत चित्रण

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : नारी के अनगिनत रूप और भाव हैं। आज की नारी कहीं फैशन के रंगों में लिपटी है तो कहीं सशक्तिकरण, बदलाव और विकास का पर्याय है। नारी के ऐसे ही विभिन्न रूप-रंग और भाव को कैनवस पर सजाने का काम किया है चित्रकार सुजाता अग्रवाल ने। आइफैक्स गैलरी में 'स्पेक्ट्रम' नाम से सजी कला दीर्घा में कलाकार ने नारी के बदलते रूपों और समाज पर इसके प्रभाव को दर्शाने का काम किया है। दर्शकों द्वारा भी कलाकार को सराहना मिल रही है।

प्रदर्शनी में 40 से अधिक चित्रों के माध्यम से सुजाता ने जहां एक ओर एक मजदूर स्त्री के संघर्ष को दिखाया है वहीं, फैशन जगत में महिलाओं के वर्चस्व को भी खूबसूरती से उकेरा है। चित्रकार ने कैनवस पर चरवाहे के रूप में स्त्री के पशु प्रेम को दर्शाने के साथ ही उग्र रूप में विनाशकारी शक्ति को भी जगह दी है। प्रदर्शित चित्रों में प्रकृति व नारी के संबंध और कलाकार द्वारा इस्तेमाल किए गए चटख बैंगनी और लाल एक्रेलिक रंग दर्शकों को खूब लुभा रहे हैं। यह प्रदर्शनी 21 अप्रैल तक चलेगी।

कोमलता और संवेदना : स्त्री विशेष चित्रकारी और इस ओर झुकाव के संदर्भ में सुजाता कहती हैं कि मैंने चित्रों के माध्यम से यह बताने की कोशिश की है कि आज की नारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। चाहे कितनी भी बाधाएं आए, उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने पसंदीदा विषयों के बारे में वे कहती हैं कि प्रकृति और नारी से जुड़े चित्रों को बनाने में मुझे आनंद आता है। यह ऐसा माध्यम है, जिससे कलाकार की कोमलता और उसकी संवेदना जाहिर होती है।