तीन दिन में होगा पीएफ के दावे का निपटान

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के पांच करोड़ अंशदाताओं को राहत देने के लिए अकाउंट ट्रांसफर और रकम निकासी जैसे सभी दावों का निपटारा तीन दिन में ही कर देने की तैयारी है। इस रिटायरमेंट फंड का प्रबंधन करने वाला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ऐसी योजना बना रहा है। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए संगठन ने अपने सभी क्षेत्रीय प्रमुखों की पांच जुलाई को एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

ईपीएफओ को इस साल 1.2 करोड़ ऐसे दावे मिलने का अनुमान है। अगर इसमें से 70 फीसद दावे भी तीन दिन में निपटा दिए गए तो सीधे-सीधे एक साल में करीब 84 लाख लोगों को लाभ पहुंचेगा। इस संबंध में जारी एक कार्यालय आदेश में कहा गया है कि तेजी से दावों के निपटारे से संगठन की छवि सुधरेगी। ईपीएफओ पहले ही 15 जून से पहले के लंबित दावों के निपटारे के लिए अभियान शुरू कर चुका है। इस साल 11 जून तक संगठन के पास 5,38,704 दावे लंबित थे। बीते वित्ता वर्ष 2012-13 के दौरान 1.08 करोड़ दावों का निपटान किया गया। इसमें से 12.62 लाख दावे 30 दिन और 1.41 लाख दावे 90 दिन के बाद निपटाए गए।

ईपीएफओ पहली जुलाई से एक केंद्रीय क्लीयरेंस हाउस भी चालू कर देगा। इसे कर्मचारियों को अपने पीएफ के ट्रांसफर और निकासी के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा मिलेगी। इस सुविधा से अंशदाताओं को अपने आवदेन की प्रगति की जानकारी मिलती रहेगी। नई प्रणाली में पूर्व कर्मचारी के पीएफ अकाउंट के ब्योरे को सत्यापित कराने की जिम्मेदारी ईपीएफओ की होगी। अब तक खुद कर्मचारियों को ही इसे अपने पूर्व नियोक्ता से सत्यापित कराना पड़ता था।

ईपीएफओ के ट्रस्टी बोर्ड का पुनर्गठन

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के निर्णय लेने वाले शीर्ष निकाय केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया है। केंद्रीय श्रम मंत्री की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड में नए प्रतिनिधियों के नामों की अधिसूचना जारी कर दी गई है। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों में एडी नागपाल, एके पद्मनाभन, एम जगदीश्वर राव, प्रभाकर जे बानासुरे, संकर साहा, जी संजीवा रेड्डी, अशोक सिंह, रमन पांडे शामिल हैं। नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों में जेपी चौधरी, राम एस तनेजा, शरद एस पाटिल, यूडी चौबे, जीपी श्रीवास्तव, एस सेन, बीपी पंत, बादीश जिंदल, रवि विग और एसएस पाटिल का नाम है। 43 सदस्यीय सीबीटी के अन्य सदस्यों में केंद्रीय श्रम सचिव व अन्य अधिकारियों के अलावा राज्यों के श्रम विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं।